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ज़िंदगी यूँ भी गुज़र ही जाती,
क्यों तेरा रहगुज़र याद आया।

मिर्ज़ा ग़ालिब


यानी: ज़िंदगी वैसे भी किसी न किसी तरह कट ही रही थी, फिर अचानक तेरा रास्ता (तेरी यादें, तेरा साथ) क्यों याद आ गया? जब मैं तुझसे दूर रहकर जीना सीख चुका था, तो फिर ये पुरानी यादें क्यों दिल में हलचल मचा रही हैं?


गहरी तशरीह: यह शेर बिछड़े हुए प्यार की कसक और यादों की बेइख़्तियार वापसी को बयान करता है। जब इंसान किसी से दूर होता है, तो वक़्त के साथ वह अपने आपको संभालना सीख लेता है। ज़िंदगी बिना उस शख़्स के भी चलती रहती है। लेकिन फिर अचानक कोई छोटी-सी बात, कोई जगह, कोई लम्हा उस पुराने अज़ीज़ को याद दिला देता है, और वो तमाम एहसास फिर से ताज़ा हो जाते हैं। यह यादें जितनी ख़ूबसूरत होती हैं, उतनी ही तकलीफ़देह भी, क्योंकि ये एक बार फिर उस कमी का एहसास दिलाती हैं जिसे भुलाने की कोशिश की जा रही थी।


मिसाल: जैसे कोई बरसों बाद अपने पुराने महबूब की गली से गुज़रे, या कहीं कोई बात सुने जो उससे जुड़ी हो, और अचानक वह तमाम बीती हुई बातें फिर से ज़हन में लौट आएँ। ज़िंदगी आगे बढ़ रही थी, लेकिन एक लम्हे ने फिर से अतीत की राहों में धकेल दिया।

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